जनसैलाब ने बता दिया उमाशंकर मरे नहीं,अमर हो गए

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जनसैलाब ने बता दिया उमाशंकर मरे नहीं,अमर हो गए

आमजन को चाम नहीं, काम प्यारा होता, जनसैलाब बताया

विकास व गरीब व असहायों की मदद कर आमजन के दिलों पर किया राज

विकास हो या गरीब के बेटियों की हो शादी, दिल से किया काम

उमाशंकर से माननीयों को लेनी चाहिए सीख

श्रवण कुमार पांडेय

बलिया। कहा जाता है कि आईना झूठ नहीं बोलता। ऐसी ही मिशाल बलिया के रसड़ा विधानसभा के बसपा विधायक उमाशंकर सिंह ने परलोक जाते-जाते पेश कर दिया। यह मैं नहीं, बल्कि उनकी अंतिम शव यात्रा में उमड़ी जनसैलाब ने बता दिया कि वह जनपद ही नहीं, पूरे प्रदेश में जन-जन के दिलों में कैसे वास करते थे। उनके पार्थिव शरीर की एक झलक पाने के लिए लोग सुबह 10 बजे से चल चिल्लाती धूप में नगर के विभिन्न छतों से लेकर ओवरब्रिज तक, चित्तू पांडेय से मालगोदाम और मालगोदाम से शिवरामपुर गंगा घाट तक टकटकी लगाए खड़े रहे। इनके अंतिम शव यात्रा में उमड़ी जनसैलाब से हमारे जनपद व प्रदेश के जनप्रतिनिधियों को सबक लेनी चाहिए। आमजन को चाम नहीं, काम प्यारा होता है। उमाशंकर सिंह मरे नहीं, बल्कि वह सदा के लिए अमर हो गए।


आपको बता दे की बहुत ही कम उम्र में जनपद ही नहीं, पूरे प्रदेश में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले बलिया जिले के रसड़ा विधानसभा के विधायक उमाशंकर सिंह जीते जी भी इतिहास रचा और जाते-जाते भी इतिहास रच के गए। यह अपने विधान सभा में विकास को प्रमुखता से ध्यान में रखते हुए विकास किया और गरीब, असहाय परिवारों के बच्चियों की बाप बनकर एक बार नहीं दो बार विशाल शादी समारोह आयोजित कर कन्यादान देकर इतिहास रचने का काम किया। इसके बाद भाजपा सरकार ने भी सामूहिक विवाह योजना आरंभ की। उमाशंकर सिंह के दरबार में जो भी जो मांगने गया। वहां से खाली हाथ नहीं लौटा। यही कारण रहा कि आज वह जनपद ही नहीं, पूरे प्रदेश में जन-जन के दिलों में बस गए और जनता ने उन्हें दिल्ली से लखनऊ, लखनऊ से बलिया और बलिया से शिवरामपुर गंगा घाट तक जगह-जगह स्वागत करने का काम किया। उनके अंतिम शव यात्रा में हर जाति धर्म और हर पार्टी के लोग सम्मिलित होने का काम किया। कारण कि उमाशंकर सिंह कभी जात-पात और पार्टी विशेष पर ध्यान नहीं दिया। वह सदैव जनपद के विकास और गरीब, असहाय के बारे में सोचने का काम करते थे। जिससे हर पार्टी, हर जाति धर्म के चहेते बन गए। जिसका जीता जागता उदाहरण शुक्रवार की अंतिम यात्रा में देखने को मिला। उमाशंकर सिंह मरे नहीं अमर हो गए। उनकी गाथा युगों युगों तक गाई जाएगी। विधायक उमाशंकर सिंह की भांति अन्य जनप्रतिनिधियों को भी सीख लेकर और अपना स्वार्थ त्याग कर जनपद के विकास और आमजन की पीड़ा को दूर करने का काम करना चाहिए।

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