प्रचार-प्रसार के अभाव में नंदीग्राम मेले में पशुओं की आवक हुई कम

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प्रचार-प्रसार के अभाव में नंदीग्राम मेले में पशुओं की आवक हुई कम

ददरी मेले के नंदीग्राम मेले पहुंचे कुछ घोड़े, खच्चर व गदहे

पशुपालकों को पता नहीं, ददरी मेले में लगा है पशु मेला

लम्पी बीमारी के कारण दो सालों से नहीं लगा पशु मेला

नगर पालिका एवं जिला प्रशासन द्वारा जिले में कहीं नहीं लगाया गया पशु मेले का होर्डिंग व बैनर

चार दिन में नगर पालिका को मात्र 28800 रुपए की हुई आमदनी

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नंदीग्राम मेले में दूर-दूर तक गाय व भैंस का पता नहीं, पशुओं के इंतजार में बैठे व्यापारी

डाला छठ बाद पशुओं की और पहुंचने की उम्मीद

बलिया। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी भगृ मुनि के शिष्य दर्दर मुनि के नाम पर लगने वाले ददरी मेला के नंदीग्राम मेला की शुरूआत दीपावली व भैया दूज के बाद हो गई है। इसीक्रम में नगर पालिका द्वारा नंदीग्राम में आने वाले पशु व्यापारियों व अतिथियों की सुरक्षा की व्यवस्था की नगर पालिका प्रशासन द्वारा की जा रही है। लेकिन नगर पालिका व जिला प्रशासन द्वारा प्रचार-प्रसार जनपद स्तर पर नहीं किए जाने के कारण ददरी मेले के नंदीग्राम पशु मेले में पशुओं की आवक कम हो गई है। इसका मुख्य कारण लम्पी बीमारी के कारण दो-तीन सालों से नंदी ग्राम पशु मेला का आयोजित ना होना भी बताया जा रहा है। अगर जिले के विभिन्न तहसील, चौराहा एवं बॉर्डर पर नंदीग्राम पशु मेला का प्रचार- प्रसार करने के लिए होर्डिंग या बैनर लगाया गया होता तो नंदीग्राम मेले में पशुओं की भरमार लग गई होती। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जिसके कारण नंदीग्राम मेले में जहां दीपावली और भैया दूज बाद चहलकदमी बढ़ जाती और नगर पालिका को भी आमदनी होती।






बता दे कि प्रत्येक वर्ष की भांति कार्तिक शुक्ल पक्ष के प्रथमा तिथि से ददरी मेले के नंदीग्राम मेले की शुरूआत हो जाती है। दीपावली व भैया दूज पर्व बीतने के बाद बैल व बछड़ों के विभिन्न नस्ल नंदीग्राम मेले में पहुंचना शुरू करते देते थे। लेकिन इस वर्ष प्रचार प्रसार के अभाव में पशुओं की आवक नंदीग्राम मेले में नहीं हो सकी है। रविवार को नंदीग्राम मेले में गदहे व खच्चर के साथ ही कुछ घोड़े मेले में पहुंचे। जिले व आस पास के जिले के पशु व्यापारियों को पता नहीं है कि इस वर्ष नन्दी ग्राम पशु मेला लगा है। कारण कि लम्पी बीमारी के कारण दो-तीन वर्षों से नंदीग्राम मेला आयोजित नहीं हो पा रहा था। पशुपालकों का कहना था कि नगर पालिका एवं जिला प्रशासन को जनपद के विभिन्न तहसीलों एवं जिले के बॉर्डर पर होर्डिंग एवं बैनर लगाकर प्रचार प्रसार करना चाहिए था। हालांकि मेले पहुँचे कुछ पशु व्यापारियों ने बताया कि डाला छठ के बाद पशुओं की आवक बढ़ सकती है। वही नंदीग्राम मेले में कुछ व्यापारी पशुओं का इंतजार करते नजर आए। आपको बता दे की चार दिन में नंदीग्राम मेले से नगर पालिका प्रशासन को एंट्री के नाम पर 28000 रुपए प्राप्त हुए। जबकि दो दिन में दो घोड़े बीके। जिसमें रजिस्ट्रेशन के नाम पर 800 प्राप्त हुआ। जबकि पहले यह लाखों में पहुंच जाता था।

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