संघर्ष से समाजवाद तक की अविराम यात्रा छोड़ गए रामगोविंद चौधरी

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संघर्ष से समाजवाद तक की अविराम यात्रा छोड़ गए रामगोविंद चौधरी

छात्र राजनीति से जेल तक, लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए चले जेपी आंदोलन में रहे सक्रिय

श्रवण कुमार पांडेय

बलिया। पूर्व मंत्री एवं समाजवादी नेता रामगोविंद चौधरी का निधन बलिया के राजनीतिक और सामाजिक जीवन के लिए बड़ी क्षति है। छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन में कदम रखने वाले रामगोविंद चौधरी ने करीब पांच दशक के राजनीतिक सफर में संघर्ष, समाजवाद और जनसरोकारों को अपनी राजनीति का आधार बनाए रखा। छात्र जीवन में अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से शुरू हुई उनकी यात्रा विधायक, कैबिनेट मंत्री और उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तक पहुंची। 9 जुलाई 1953 को जन्मे रामगोविंद चौधरी तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय से हुई, जबकि स्कूली शिक्षा सिकंदरपुर में पूरी की। इसके बाद उन्होंने सतीश चंद्र कॉलेज में बीएससी में प्रवेश लिया। छात्र समस्याओं को लेकर आंदोलनों में सक्रियता के चलते उन्हें कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्रवेश लिया और यहीं से उनकी छात्र राजनीति ने व्यापक जनसंघर्ष का रूप लिया।

वर्ष 1972 में वे टाउन कॉलेज छात्रसंघ के महामंत्री निर्वाचित हुए और 1974 में अध्यक्ष बने। आपातकाल के दौर में लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए चले जेपी आंदोलन में वे सक्रिय रहे और जनपद छात्र युवा वाहिनी के सह-संयोजक की भूमिका निभाई। आंदोलन के दौरान उनकी गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित हुआ और टीडी कॉलेज परिसर से उन्हें गिरफ्तार किया गया। करीब 24 महीने जेल में रहने के बाद रिहाई हुई। उनकी रिहाई के दिन ही बलिया कलेक्ट्रेट में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर नामांकन करने पहुंचे थे। छात्रों की भीड़ के साथ पहुंचे रामगोविंद चौधरी को चंद्रशेखर ने अपने पास बुलाया। यह मुलाकात आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन में महत्वपूर्ण संबंध और मार्गदर्शन का आधार बनी।

विधायक से कैबिनेट मंत्री तक

वर्ष 1977 में उन्होंने तत्कालीन चिलकहर विधानसभा क्षेत्र से जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद लगातार पांच बार विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। विधायक रहते उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री भी हासिल की। वर्ष 1991 में मुलायम सिंह यादव के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बने और खाद्य प्रसंस्करण एवं उद्यान विभाग की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2000 में समाजवादी जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बने। वर्ष 2002 में बांसडीह विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में समाजवादी पार्टी के समर्थन से चुनाव लड़ा और तत्कालीन कैबिनेट मंत्री बच्चा पाठक को करीब छह हजार मतों से पराजित किया। वर्ष 2004 में उन्हें मुलायम सिंह यादव सरकार में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वर्ष 2007 में वे बांसडीह से करीब 264 मतों से चुनाव हार गए, लेकिन 2012 में फिर विधानसभा पहुंचे और अखिलेश यादव सरकार में बेसिक शिक्षा तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के कैबिनेट मंत्री बने। बाद में समाज कल्याण और पंचायती राज जैसे विभागों की जिम्मेदारी भी संभाली।
वर्ष 2017 में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी केतकी सिंह को करीब 1,655 मतों से पराजित किया। इसके बाद उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता विरोधी दल की जिम्मेदारी मिली।

शिक्षा और पंचायतों से जुड़े फैसलों के लिए भी याद किए जाएंगे रामगोविंद

मंत्री रहते रामगोविंद चौधरी के कार्यकाल में शिक्षा और पंचायतों से जुड़े कई फैसले चर्चा में रहे। बेसिक शिक्षा मंत्री के रूप में शिक्षकों के खातों में ऑनलाइन वेतन भेजने की व्यवस्था, शिक्षामित्रों के समायोजन तथा सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में अधिसंख्य पदों पर शिक्षकों के समायोजन जैसे निर्णय लिए गए। पंचायती राज मंत्री के रूप में ग्राम प्रधानों और ब्लॉक प्रमुखों को मानदेय देने की व्यवस्था भी उनके कार्यकाल की प्रमुख पहलों में शामिल रही।

‘मेरे जीवन की ऐसी क्षति, जिसकी भरपाई संभव नहीं’

रामगोविंद चौधरी के निधन पर समाजवादी पार्टी के जिला प्रवक्ता सुशील कुमार पांडेय ‘कान्ह जी’ ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि “रामगोविंद चौधरी का जाना मेरे लिए केवल एक अपूरणीय क्षति नहीं, बल्कि मेरे जीवन की एक ऐसी व्यक्तिगत क्षति है, जिसकी भरपाई शायद कभी संभव नहीं होगी।” रामगोविंद चौधरी का राजनीतिक जीवन चुनावी जीत-हार से कहीं आगे संघर्ष और विचारधारा की यात्रा रहा। छात्र आंदोलनों से निकला यह नेतृत्व आपातकाल की जेल से होते हुए विधानसभा, मंत्रिमंडल और नेता प्रतिपक्ष के पद तक पहुंचा। उनके समर्थकों और सहयोगियों के लिए उनकी सबसे बड़ी पहचान संघर्षशील समाजवादी नेता और आमजन की आवाज उठाने वाले जनप्रतिनिधि के रूप में रही।

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