
दमनकारी नीति के विरोध में लोनिवि के ठेकेदार करेंगे निविदा का बहिष्कार
मुख्यालय घेराव करने की भी दी चेतावनी
बलिया। जनपद के लोक निर्माण विभाग के ठेकेदारों ने निविदाओं के बहिष्कार का निर्णय लिया है। साथ ही में यदि एक हफ्ते के अंदर कोई उचित कार्रवाई नहीं की जाती है तो प्रमुख अभियंता कार्यालय का घेराव करने का भी निर्णय लिया।
बताया कि लोक निर्माण विभाग द्वारा पिछले तीन वर्षों में नित्य नए नियम जो बनाए गए हैं, वह सभी जन विरोधी और लोक निर्माण विभाग के लिए अत्यंत ही घातक सिद्ध हुए है। चाहे कोषागार प्रणाली हो, जिसके कारण डिपॉजिट के भुगतान हजारों करोड़ों रुपए ठेकेदारों के फंस गए और ठेकेदार बर्बादी के कगार पर पहुंच गया या रॉयल्टी के संबंध में हो लोक निर्माण विभाग द्वारा पहले कार्यों में खुद रॉयल्टी की कटौती कर लेता था। किंतु नई व्यवस्था लाकर के रॉयल्टी के चक्कर में ठेकेदारों को उलझा दिया गया और उसे रॉयल्टी के नाम पर छह गुना कटौती की जा रही। ठेकेदार को ही रॉयल्टी का निरीक्षक बना दिया गया, उसके बाद अब नई व्यवस्था ग्रामीण मार्गों पर पांच वर्षीय अनुरक्षण की लागू की जा रही है। इसके संबंध में लोक निर्माण विभाग के अधिकारी खुद असमंजस में है। शासनादेश तो जारी हो गया किंतु यसओपी जारी नहीं हो पाया। उन्हें खुद समझ में नहीं आ रहा कैसे लागू की जाए और सबसे हास्यापद स्थिति तब उत्पन्न हो गई। जब प्रमुख अभियंता के बनाये हुये खुद के नियम स्वीकृति के प्रत्याशा में निविदाएं जारी होनी शुरू हो गई। बिना यसओपी के निविदाएं होनी शुरू हो गई और नियम बनाने वाले खुद ही नियमों की धज्जियां उड़ाने लगे। इस संबंध में अवगत कराने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय स्तर पर बताया गया कि शासन का बहुत दबाव है। ऐसी स्थिति में एकदम से नियम विरुद्ध स्थिति उत्पन्न हो गई है। मांग किया कि ठेकेदारों की छह सूत्री मांगों के साथ अनुरक्षण नीति में बदलाव किया जाए। जल्दी बाजी में लागू की जा रही अनुरक्षण नीति प्रदेश की सड़कों के अनुरूप नहीं है। प्रदेश की सड़कों को पहले मेंटेन किया जाए, बाजार एवं कस्बो में नाली निर्माण हो बाढ़ प्रभावित सड़कों के संबंध में नई नीति बनाई जाए। उसके बाद ग्रामीण मार्गो में अनुरक्षण की व्यवस्था लागू की जाए। नवनिर्माण के मार्ग में अनुरक्षण व्यवस्था पीएमजीएसवाई के अनुसार दरो एवं मांनक को सहित लागू की जाए।