लखनऊ से आई टीम ने दो किया गिरफ्तार

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लखनऊ से आई टीम ने दो किया गिरफ्तार

शराब व्यवसायी को फर्जी तरीके से फंसाने का मामला

मुख्य आरोपी अब भी चल रहा फरार

अब देखना यह है कि कब उजागर करती है लखनऊ से जांच करने आई टीम

बलिया। खबर यूपी के बलिया के शहर कोतवाली क्षेत्र के कदम चौराहे से है, जहां दो मई को जिला आबकारी अधिकारी की अवैध वसूली की लिखित शिकायत जिलाधिकारी से करना अंग्रेजी शराब के थोक व्यवसायी छितेश्वर जायसवाल को भारी पड़ गया। जिला आबकारी अधिकारी ने खुन्नस में आकर शराब व्यवसायी के कटरे से दो बैग में 8PM टेट्रा पैक शराब का खाली रेपर बरामद कर कोतवाली व आबकारी पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। शराब व्यवसायी चिल्लाता रहा कि मुझे फर्जी तरीके से साजिशन फंसाया गया है, लेकिन किसी ने उसकी एक नहीं सुनी।

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आपको बता दे कि जमानत पर जेल से छूटने के बाद छितेश्वर जायसवाल ने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए प्रयास करना शुरू किया तो स्थानीय सतनी सराय पुलिस चौकी के सीसीटीवी फुटेज में वो साक्ष्य मिल गया। जिससे साबित हो गया कि साजिश के तहत दो युवकों के द्वारा पिट्ठू बैग को शराब व्यापारी के मकान में रखवाया गया। इसके बाद करीब आधे घंटे बाद आबकारी व पुलिस की टीम पहुंचकर रेपर से भरे बैग को बरामद करने के साथ ही छितेश्वर को बुलाकर गिरफ्तार किया और संबंधित धाराओं में जेल भेज दिया।

अपने आपको अपमानित महसूस करते हुए छितेश्वर जायसवाल ने अपने शराब के कारोबार को बंद करने के साथ ही मुख्यमंत्री सहित आबकारी मंत्री व उच्चाधिकारियो को लिखित शिकायत कर प्रकरण की बाहरी टीम से जांच कराने की मांग की। जिसके बाद शासन के निर्देश पर इस प्रकरण में लखनऊ से आई टीम ने तहकीकात कर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पकड़े गए आरोपी के बयान के आधार पर एक और आरोपी को गिरफ्तार किया। जबकि इस प्रकरण का मास्टरमाइंड संजय पाण्डेय अभी भी फरार चल रहा है। वही आबकारी निरीक्षक बांसडीह संदीप यादव के मोबाइल को लखनऊ से आई जांच टीम ने पूंछताछ के बाद जब्त कर लिया है। दूसरे आबकारी निरीक्षक के छुट्टी पर होने से उनका बयान दर्ज नहीं हो पाया है। लखनऊ से आई जांच टीम जिस प्रकार से जांच कर रही है, उससे आबकारी विभाग में हड़कंप मंचा हुआ है।


शराब व्यवसायी छितेश्वर जायसवाल ने जिला आबकारी अधिकारी पर दुकानों से वसूली करने का भी लिखित शिकायत किया है। लखनऊ की जांच टीम के राडार पर स्थानीय जांच अधिकारी भी हो सकते है। अब देखना यह है कि किसी को फर्जी मामले में फंसा कर अपराधी बनाने की कोशिश करने में शामिल साजिशकर्ताओं को जांच टीम कब उजागर करती है।

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