
चितबड़ागांव में लंपी ने पसारा पांव, मवेशियों की मौत से पशुपालक भयभीत
बलिया। चितबड़ागांव क्षेत्र में लंपी स्किन डिज़ीज़ तेजी से पांव पसार रही है। कस्बा और आसपास के गाँवों में बड़ी संख्या में गाय-भैंस इस रोग की चपेट में आ रहे हैं। बीमारी के बढ़ते प्रकोप से पशुपालक दहशत में हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर न तो ठोस पहल दिख रही है और न ही स्पष्ट जानकारी दी जा रही है।




चितेश्वर नगर निवासी पशुपालक हरिशंकर यादव ने बताया कि उनका एक पशु कई दिनों से इस बीमारी से जूझ रहा है। कहा कि आज तक कस्बा में टीकाकरण की कोई व्यवस्था नहीं हुई। हालात बिगड़ते जा रहे हैं, हम लोग बेहद परेशान हैं। इसी मोहल्ले के बृजभान सिंह और पटेल नगर निवासी बाउल दूबे ने भी अपनी गायों के लंपी से पीड़ित होने की पुष्टि की। वहीं, शास्त्री नगर के तुफानी राजभर की एक बछिया इस रोग से दम तोड़ चुकी है।गाँवों की हालत भी गंभीर है। अख्तियारपुर, नगवा गाई, बीबीपुर और बढ़वलिया में बड़ी संख्या में मवेशी बीमार हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने कर्मचारियों की तैनाती तो की है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई असरदार पहल नहीं हो रही। उन्होंने यह भी कहा कि राजकीय पशु चिकित्सा केंद्र में डॉक्टर और स्टाफ की भारी कमी के चलते झोलाछाप डॉक्टर लंपी को कमाई का जरिया बना बैठे हैं। पशुपालकों ने जिला प्रशासन से माँग की है कि गाँव-गाँव में तत्काल टीकाकरण अभियान चलाया जाए और बीमार पशुओं के इलाज की मुफ्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि हालात काबू में आ सकें और मवेशियों की जान बचाई जा सके।इस बाबत मुख्य चिकित्सा पशुपालन सुनील कुमार मिश्रा ने बताया कि वहाँ तैनात डॉक्टर की ड्यूटी बाढ़ प्रभावित भरौली क्षेत्र में लगाई गई थी, जिसके चलते टीकाकरण में देरी हुई है।