चंद्रशेखर ने सत्ता के मोह में अपने सिद्धांतों व विचारों से समझौता नहीं किया : हरिवंश

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चंद्रशेखर ने सत्ता के मोह में अपने सिद्धांतों व विचारों से समझौता नहीं किया : हरिवंश

जेपी और चंद्रशेखर के जयंती वर्ष पर टीडी कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी, युवाओं से गहन अध्ययन की अपील

बलिया। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने सिद्धांतों और स्वाभिमान की राजनीति की मिसाल पेश की। उन्होंने सत्ता के मोह में अपने विचारों से समझौता नहीं किया, बल्कि आपातकाल के दौरान जेल जाना स्वीकार किया। उनका राजनीतिक जीवन संघर्ष, वैचारिक प्रतिबद्धता और लोकतांत्रिक मूल्यों का उदाहरण है। यह बातें राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने गुरुवार को टीडी कॉलेज के मनोरंजन सभागार में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं संवाद कार्यक्रम में कहीं। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के 125वें वर्ष और जननायक चंद्रशेखर के 100वें जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
मुख्य वक्ता हरिवंश ने कहा कि चंद्रशेखर का राजनीतिक जीवन करीब 65 वर्षों का रहा, जिसमें उन्होंने 40 वर्ष संसद में बिताए। भारतीय राजनीति में उनके जैसा स्वाभिमानी नेता विरले ही देखने को मिलता है। कांग्रेस में रहते हुए भी उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का विरोध किया। आपातकाल के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से कैबिनेट मंत्री बनाए जाने का प्रस्ताव ठुकराकर उन्होंने जेल जाना स्वीकार किया। यह उनकी मजबूरी नहीं, बल्कि लोकतंत्र और प्रतिरोध के पक्ष में लिया गया वैचारिक निर्णय था।


उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर विपरीत परिस्थितियों में भी खुद को मजबूत बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं। जेल में रहते हुए उन्होंने योग क्रियाएं सीखीं और कई भाषाओं का अध्ययन किया। उनकी पुस्तक मेरी जेल डायरी उनके व्यक्तित्व, विचारों और संघर्ष को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है। हरिवंश ने इस पुस्तक की भाषा और अभिव्यक्ति की भी सराहना की। हरिवंश ने कहा कि चंद्रशेखर के नेतृत्व में जनता पार्टी ने देश में पहली बार कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया। प्रधानमंत्री के रूप में अपने लगभग छह महीने के कार्यकाल में भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण काम किए। उन्होंने चंद्रशेखर को ऐसा राजनेता बताया, जो पूरे समाज को अपना परिवार मानते थे। उनके लेखन में भी निजी परिजनों के बजाय व्यापक सामाजिक सरोकार दिखाई देते हैं। उन्होंने युवा पीढ़ी से चंद्रशेखर के जीवन और विचारों का गंभीरता से अध्ययन करने की अपील करते हुए कहा कि चंद्रशेखर अपने आप में एक संस्था थे। उन्होंने कहा कि जयप्रकाश नारायण और चंद्रशेखर के राजनीतिक प्रभाव ने देश में लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्तमान वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सक्षम नेतृत्व देश को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।

कार्यक्रम के दौरान हरिवंश ने जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के मेधावी विद्यार्थियों को स्मृति चिह्न और शाल देकर सम्मानित किया। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोगों को लोक सेवक एवं मेधा सम्मान प्रदान किया गया। सम्मानित होने वालों में पूर्व प्रमुख अनिल सिंह, प्रवीण सिंह, इफ्तखार खान, रूपेश सिंह, दुष्यंत सिंह, राम प्रकाश यादव, प्रिया, गीता, डॉ. कादंबनी सिंह, शशिप्रेम देव, मुकेश सिंह, दिलीप कुमार सिंह, उमेश सिंह, भवतोष पांडेय, प्रदीप यादव, अजय सिंह, धर्मेंद्र प्रताप सिंह, खुशी कुमारी, रिया वर्मा, भाग्यलक्ष्मी और रामनाथ पासवान सहित अन्य लोग शामिल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता टीडी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दयालानंद राय ने की, जबकि संचालन अखिलेश सिन्हा ने किया। इस मौके पर सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, मनोरंजन सिंह, डॉ. अखिलेश राय, अनिल सिंह, आशीष त्रिवेदी, रणवीर सिंह सेंगर, उपेंद्र सिंह, उमेश सिंह और मनोज शर्मा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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