


शताब्दी वर्ष पर 3000 स्वयंसेवकों ने निकाला पथ संचलन
शाखा में आकर ही संघ को समझा जा सकता है : मुकुल कानिटकर


बलिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस एवं विजयादशमी उत्सव के अवसर पर गुरुवार को बलिया नगर में भव्य पथ संचलन निकाला गया। संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में करीब तीन हजार स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में शामिल हुए। घोष की धुन पर कदमताल करते स्वयंसेवकों ने अनुशासन, एकता, संगठन और राष्ट्रसमर्पण का संदेश दिया। पथ संचलन दोपहर तीन बजे नगर के चार स्थानों टाउन हॉल परिसर, पशु चिकित्सालय, दयानंद विद्या मंदिर (आर्य समाज रोड) और बिचला घाट स्थित श्री हनुमान मंदिर से एक साथ शुरू हुआ। विभिन्न मार्गों से होते हुए चारों संचलन शहीद पार्क चौक पर पहुंचे, जहां सभी स्वयंसेवक एकत्र होकर एक साथ आगे बढ़े। इसके बाद विक्रमा सिनेमा रोड, श्री हनुमानगढ़ी, एलआईसी, मालगोदाम रोड, रेलवे स्टेशन, चित्तू पांडेय चौराहा, टीडी कॉलेज चौराहा और कुँवर सिंह चौराहा होते हुए वीर लोरिक स्पोर्ट्स स्टेडियम पहुंचे। प्रमुख मार्गों पर स्वयंसेवकों की अनुशासित कदमताल लोगों के आकर्षण का केंद्र रही।



वीर लोरिक स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित समापन समारोह एवं बौद्धिक कार्यक्रम का शुभारंभ विभाग संघचालक राम प्रताप, सह जिला संघचालक डॉ. विनोद सिंह, मुख्य अतिथि प्रख्यात शिक्षाविद एवं अखिल भारतीय प्रचार टोली के सदस्य मुकुल कानिटकर तथा कार्यक्रम अध्यक्ष अनुज सरावगी ने भारत माता, मां दुर्गा और भगवान श्रीराम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुख्य अतिथि मुकुल कानिटकर ने संघ और शाखा की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ को केवल पुस्तकें पढ़कर नहीं समझा जा सकता। उन्होंने कहा कि जिस तरह गंगा में उतरकर ही उसके पावित्र्य का अनुभव किया जा सकता है, उसी प्रकार शाखा में आकर ही संघ के संस्कार, वातावरण और कार्यपद्धति को समझा जा सकता है। पुस्तकें संघ का परिचय दे सकती हैं और संवाद जिज्ञासाओं का समाधान कर सकता है, लेकिन शाखा का प्रत्यक्ष अनुभव संघ के जीवन को निकट से समझने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि शाखा व्यक्ति निर्माण, अनुशासन, आत्मीयता, सेवा और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का माध्यम है। संघ की सौ वर्षों की यात्रा इस बात को रेखांकित करती है कि राष्ट्र का उत्थान केवल शासन या व्यवस्थाओं से नहीं, बल्कि चरित्रवान व्यक्तियों, संगठित समाज और कर्तव्यनिष्ठ नागरिकों के सामूहिक प्रयास से होता है।



कानिटकर ने सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर समरसता और आत्मीयता का भाव विकसित करने तथा सेवा कार्यों के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में संस्कार, स्वाभिमान और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने पथ संचलन को केवल कदमताल का प्रदर्शन न बताते हुए इसे अनुशासन, एकता, सामूहिकता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक बताया। कहा कि संघ का शताब्दी वर्ष आत्ममंथन के साथ भविष्य के लिए नए संकल्प लेने का अवसर है। परिवार में संस्कार, समाज में समरसता, जीवन में अनुशासन और राष्ट्र के प्रति निष्ठा ही सशक्त भारत के निर्माण की आधारशिला है। कार्यक्रम का संचालन जिला कार्यवाह अरुण मणि ने किया। मुख्य शिक्षक उमापति रहे। रितेश ने एकलगीत प्रस्तुत किया, जबकि भोला ने संघ प्रार्थना कराई। कार्यक्रम के अंत में संघ प्रार्थना के साथ समारोह का समापन हुआ। इस अवसर पर नगर संघचालक परमेश्वरन श्री, सह नगर संघचालक ओम प्रकाश राय, सह प्रांत प्रचारक श्री सुरजीत, प्रांत कार्यवाह विनय, प्रांत संयोजक कुटुंब प्रबोधन संजय शुक्ल, सह विभाग कार्यवाह हरनाम, जिला प्रचारक अखिलेश्वर सहित संघ के पदाधिकारी, स्वयंसेवक, मातृशक्तियां और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।