
जिले में वैदिक मंत्रोच्चार, घंट-घड़ियाल के बीच खुला मां दुर्गा का पट
22 थाना अंतर्गत जिले में 657 स्थानों पर रखी गई मां की प्रतिमाएं
जिले में छोटी-बड़ी स्थाई रूप से 65 प्रतिमाएं है स्थापित, 10 प्रमुख देवी मंदिरों पर लगती है अधिक भीड़



रिपोर्ट : श्रवण कुमार पांडेय
बलिया। जनपद के 22 थाना अंतर्गत 657 स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं अस्थाई रूप से स्थापित की गई। जबकि छोटी – बड़ी 65 प्रतिमाएं स्थायी रूप से स्थापित हैं। इसमें से जिले के 10 प्रमुख देवी मंदिरों पर अधिक भीड़ लगती है। शनिवार सप्तमी तिथि को विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार व घंट -घड़ियाल, शंख, नगाड़ा के साथ मां का पट खोला गया। मां का पट खुलते ही मां के जयकारे से पूरा वातावरण देवीमय हो गया। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस व खुफिया विभाग गणवेश और सादे वर्दी में अपने – अपने क्षेत्र में चक्रमण करते रहे।



वर्ष 2026 आकड़े के मुताबिक जनपद के 22 थाना अंतर्गत अस्थाई रूप से 657 मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की गई है। जबकि स्थाई रूप से छोटी – बड़ी 65 मां की प्रतिमाएं स्थापित है। इसमें से 10 प्रमुख देवी मंदिरों पर अधिक भीड़ लगती है। आंकड़ों पर गौर करे तो शहर कोतवाली में अस्थाई 30 और स्थाई पांच मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित है। इसी प्रकार दुबहड़ में अस्थाई 12 और स्थाई एक, गड़वार में अस्थाई 59 और स्थाई तीन, सुखपुरा में अस्थाई 16 व स्थाई एक, फेफना में अस्थाई 28 स्थाई तीन, नरही में अस्थाई 16 और स्थाई दो तथा चितबड़ागांव में अस्थाई 15 व स्थाई दो प्रतिमाएं है। वहीं बैरिया थाना अंतर्गत अस्थाई 60 और स्थाई एक, हल्दी में अस्थाई 27 और स्थाई चार, दोकटी में अस्थाई 25 और स्थाई शून्य तथा रेवती में अस्थाई 37 और स्थाई एक, बांसडीह में अस्थाई 34 और स्थाई सात, बांसडीहरोड में अस्थाई 22 वह स्थाई सात प्रतिमाएं स्थापित है।

सहतवार थाना अंतर्गत अस्थाई 21 और स्थाई चार, मनियर में अस्थाई 12 व स्थाई एक, सिकंदरपुर अंतर्गत अस्थाई 27 और स्थाई चार तथा खेजुरी में अस्थाई 21 व स्थाई दो प्रतिमाएं है। इसी क्रम में पकड़ी में अस्थाई 14 व दो, रसड़ा कोतवाली अस्थाई 57 और स्थाई तीन, नगरा में अस्थाई 36 और स्थाई तीन, भीमपुरा में अस्थाई 33 व अस्थाई तीन तथा उभांव अंतर्गत अस्थाई 55 व स्थाई छह प्रतिमाएं स्थापित है। जहां पंडालो में विराजमान मां दुर्गा की प्रतिमाओं का पट वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ही घंट – घड़ियाल, शंख व नगाड़ों तथा जयकारो के साथ खुला। जिसे पूरा जनपद देवीमय हो गया। उधर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के प्रमुख मंदिरों, पूजा पंडालों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पुलिस चक्रमण करती रही। रविवार अष्टमी के दिन और भीड़ बढ़ने की उम्मीद है।