पुलिस रिमांड अर्जी खारिज, अक्षयवर तिवारी की रिहाई का आदेश

Spread the love

पुलिस रिमांड अर्जी खारिज, अक्षयवर तिवारी की रिहाई का आदेश


सोशल मीडिया पर चल रहे दुष्प्रचार को लेकर भी उठे सवाल, न्यायालय के आदेश से मामले ने लिया नया मोड़


बलिया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम), बलिया की अदालत ने अक्षयवर नाथ तिवारी से संबंधित मामले में पुलिस की ओर से दाखिल की गई रिमांड अर्जी को खारिज कर दिया। न्यायालय ने रिमांड के लिए प्रस्तुत आधार और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद पुलिस की मांग स्वीकार नहीं की तथा विवेचक को निर्देश दिया कि अक्षयवर नाथ तिवारी से विवेचना में सहयोग की अपेक्षा लेते हुए उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। न्यायालय के इस आदेश के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अक्षयवर नाथ तिवारी पक्ष का दावा है कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर कृपा शंकर तिवारी, नवैश्वर तिवारी, राजकुमार यादव, शिवानंद यादव और संजय यादव द्वारा कथित तौर पर फर्जी एवं भ्रामक प्रचार किया जा रहा था। उनका कहना है कि न्यायालय के आदेश से इन दावों की वास्तविकता पर सवाल खड़े हुए हैं।


2017 के रागिनी हत्याकांड का भी जिक्र

वर्ष 2017 में हुए रागिनी हत्याकांड का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि उक्त हत्याकांड में कृपा शंकर तिवारी, प्रिंस तिवारी, नीरज तिवारी समेत कुल छह आरोपियों को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वर्तमान में इन आरोपियों के जमानत पर बाहर होने का दावा किया जा रहा है। अक्षयवर नाथ तिवारी पक्ष की ओर से आशंका जताई गई है कि जमानत पर बाहर आए उक्त लोग बाजूहन गांव में फिर किसी बड़ी साजिश को अंजाम दे सकते हैं और उनके परिवार को निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि, इन आशंकाओं और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।


पुलिस से सुरक्षा की मांग

अक्षयवर नाथ तिवारी पक्ष ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए पुलिस विभाग से आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि बाजूहन गांव में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस को सतर्कता बरतनी चाहिए और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। वहीं, न्यायालय द्वारा पुलिस रिमांड अर्जी खारिज किए जाने और तत्काल रिहाई का आदेश दिए जाने के बाद अब मामले की विवेचना आगे किस दिशा में बढ़ती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *