
बलिया के 10 की छात्रा भव्या की पहली पुस्तक ‘विषपुष्प’ अमेजन KDP पर प्रकाशित, हर्ष
प्रेम, पीड़ा और अकेलेपन की भावनाओं को शब्दों में है पिरोया
नन्ही लेखिका भव्या पाण्डेय ने रचा ‘विषपुष्प’, जीवन के दर्द और आत्मबोध को कविताओं में दी आवाज


श्रवण कुमार पांडेय
बलिया। अगर मन में दृढ़ इच्छा शक्ति मजबूत हो और कुछ कर गुजरने की ललक हो तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। ऐसा ही कारनामा बलिया के शहर कोतवाली के तिखमपुर निवासी भव्या पांडेय पुत्री शैलेन्द्र पांडेय ने कर दिखाया है। कम उम्र में साहित्य के क्षेत्र में अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय देते हुए भव्या ने अपनी पहली पुस्तक ‘विषपुष्प’ का लेखन किया है। भव्या द्वारा लिखित इस काव्य-संग्रह का प्रकाशन पांच सितंबर 2026 को अमेजन किंडल डायरेक्ट पब्लिशिंग (KDP) के माध्यम से हुआ। पुस्तक अब Amazon.in पर पाठकों के लिए उपलब्ध है। यह जनपदवासियों के लिए गौरव की बात है।


आपको बता कि नन्हीं लेखक भव्या पांडेय आईसीएसई बोर्ड की कक्षा 10 की छात्रा है। जिन्होंने ‘विषपुष्प’ पुस्तक का लेखन करने का काम किया है। इस पुस्तक में `एक फूल की आत्मकथा’ एक संवेदनशील और भावनात्मक काव्य-संग्रह है, जिसमें एक फूल को प्रतीक बनाकर जीवन की विभिन्न अनुभूतियों और परिस्थितियों को अभिव्यक्त किया गया है। पुस्तक की कविताओं में प्रेम, पीड़ा, विश्वासघात, त्याग, अकेलापन, संघर्ष और आत्मबोध जैसे मानवीय भावों को बेहद संवेदनशील अंदाज में प्रस्तुत किया गया है।

पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें एक फूल की जीवन-यात्रा के माध्यम से मनुष्य के भीतर चलने वाले भावनात्मक संघर्षों को सामने लाने का प्रयास किया गया है। कविताएं पाठक को केवल भावनाओं से परिचित नहीं करातीं, बल्कि उसे अपने जीवन और आसपास की परिस्थितियों पर विचार करने के लिए भी प्रेरित करती हैं। रचनाओं में यह भाव उभरकर सामने आता है कि जीवन की सबसे बड़ी पीड़ा केवल कठिन परिस्थितियां नहीं, बल्कि मनुष्य की संवेदनहीनता भी हो सकती है। सरल भाषा, गहरे भाव और आत्मीय अभिव्यक्ति इस काव्य-संग्रह को विशेष बनाती है।


भव्या ने अपनी पहली पुस्तक में जिस संवेदनशीलता और परिपक्व सोच का परिचय दिया है, वह उनकी साहित्यिक रुचि और रचनात्मक क्षमता को दर्शाता है। कम उम्र में पुस्तक लेखन और उसके प्रकाशन की उपलब्धि निश्चित रूप से उनके लिए गौरव का विषय है। ‘विषपुष्प—एक फूल की आत्मकथा’ उन पाठकों के लिए विशेष रूप से आकर्षक हो सकती है, जो कविता के माध्यम से जीवन की भावनाओं, रिश्तों और अंतर्मन की अनुभूतियों को समझना और महसूस करना चाहते हैं। पुस्तक का प्रकाशन डिजिटल मंच पर होने से इसे देश-विदेश के पाठकों तक पहुंचने का अवसर भी मिला है। भव्या पाण्डेय की यह पहली पुस्तक उनके साहित्यिक सफर की शुरुआत है। एक छात्रा के रूप में शिक्षा के साथ-साथ लेखन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की यह पहल अन्य युवा विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायी है। भव्या बताती है कि उन्होंने लेखन की शुरुआत सात फरवरी 2024 को की थी। वह पुष्पों से बहुत प्यार करती है और उसे अपनी पुस्तक में संग्रह भी करती है। बताया कि उन्होंने अमेजन पर 30 जुलाई को आवेदन किया था जो पांच सितंबर 2026 को स्वीकृत हो गया और प्रकाशित हुआ। इनके पिता भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, बलिया में जिला समन्वयक के पद पर तैनात है। वही माता गृहिणी है। इसकी जानकारी होने पर उनके नाते व रिश्तेदारों के साथ ही शुभेच्छुओं ने बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।