
बलिया तहसीलदार अतुल हर्ष को शासन ने किया निलंबित
नामांतरण वादों के समयबद्ध निस्तारण में लापरवाही करने पर हुई कार्रवाई
बलिया। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा 34 के अन्तर्गत योजित नामान्तरण वादों के समयबद्ध निस्तारण में लापरवाही एवं उदासीनता बरतने के आरोप में तहसील सदर, जनपद बलिया के तहसीलदार अतुल हर्ष को शासन ने निलंबित कर दिया है। उनके विरुद्ध उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के तहत विभागीय कार्यवाही भी प्रस्तावित की गई है।



शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार तहसीलदार अतुल हर्ष को सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के नियम-4 के अन्तर्गत निलंबित करते हुए मंडलायुक्त कार्यालय, आजमगढ़ मंडल, आजमगढ़ से संबद्ध किया गया है। तहसीलदार के खिलाफ हुई इस कार्रवाई से राजस्व विभाग में हड़कंप मचा है। शासन की कार्रवाई को राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण को लेकर सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों को लेकर केवल निर्देश जारी करने तक बात सीमित नहीं रहेगी, बल्कि समय पर काम नहीं करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
राजस्व से जुड़े मामले सीधे तौर पर किसानों, जमीन मालिकों और आम लोगों से जुड़े होते हैं। किसी वाद के लंबे समय तक लंबित रहने से संबंधित परिवारों और उनकी संपत्ति पर भी असर पड़ता है। इसी को देखते हुए शासन की ओर से राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण को प्राथमिकता दी जा रही है।



निलंबन अवधि में मिलेगा जीवन निर्वाह भत्ता
निलंबन की अवधि में तहसीलदार अतुल हर्ष को वित्तीय नियम संग्रह खंड-2, भाग-2 से 4 के मूल नियम-53 के प्रावधानों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। जीवन निर्वाह भत्ते की धनराशि अर्द्ध वेतन पर देय अवकाश वेतन की राशि के बराबर होगी। उन्हें जीवन निर्वाह भत्ते की धनराशि पर महंगाई भत्ता भी अनुमन्य होगा, यदि ऐसा भत्ता संबंधित अवकाश वेतन पर देय है।
हालांकि ऐसे अधिकारी को जीवन निर्वाह भत्ते के साथ कोई महंगाई भत्ता देय नहीं होगा, जिन्हें निलंबन से पूर्व प्राप्त वेतन के साथ महंगाई भत्ता अथवा महंगाई भत्ते का उपान्तिक समायोजन प्राप्त नहीं था।
शर्तों के अधीन मिलेंगे अन्य प्रतिकर भत्ते
निलंबन के दिनांक को प्राप्त वेतन के आधार पर अन्य प्रतिकर भत्ते भी निलंबन अवधि में नियमानुसार देय होंगे। इसके लिए यह समाधान होना आवश्यक होगा कि संबंधित मद में वह खर्च वास्तव में किया जा रहा है, जिसके लिए प्रतिकर भत्ते अनुमन्य हैं। शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उपरोक्त मदों का भुगतान तभी किया जाएगा, जब तहसीलदार अतुल हर्ष इस आशय का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करेंगे कि वह किसी अन्य सेवायोजन, व्यापार, वृत्ति या व्यवसाय में नहीं लगे हैं ।