बाढ़ विभाग को नहीं था अंदाजा, घाघरा तोड़ देगी NH-31

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बाढ़ विभाग को नहीं था अंदाजा, घाघरा तोड़ देगी NH-31

मझौंवा, रामगढ़ इलाके में गंगा कटान को रोकने के लिए डालते गए अरबों का बोल्डर

एनडीआरएफ ने आमजन संग पशुओं को भी पहुँचाया सुरक्षित स्थान

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बलिया। वैसे राष्ट्रीय राजमार्ग को बचाने के लिये बाढ़ खंड विभाग मझौंवा, रामगढ़ इलाके में गंगा की कटान से बचाने के लिये अब तक अरबों रुपए का बोल्डर बिछा रखा है। लेकिन विभाग को इसका अंदाजा नहीं था कि घाघरा भी एनएच-31 को तोड़ सकती है। यही वजह रहा कि बचाव से संबंधित कार्य गंगा नदी के किनारे एनएच-31 मझौंवा रामगढ़ में ही होता रहा। उधर, चांददियर स्थित यादव नगर के लोगों को यह नहीं पता था कि इनके घरों और गांव में घाघरा का पानी पहुंचेगा।लेकिन जैसे ही एनएच-31 टूटा गंगा ने अपना रास्ता यादव नगर की तरफ भी बना लिया। वैसे एनडीआरएफ ने चांददियर में मोर्चा संभाल लिया और लोगों को बाहर निकालते हुए मुख्य सड़क तक पहुंचाने का काम किया। वहीं कुछ लोग भूमि तल छोड़कर छतों को ही अपना सुरक्षित स्थान बना लिया। लेकिन वे अपने जानवरों, गाय, भैंस, बकरियों को पानी से बचाकर उपर नहीं ले सके। लेकिन जानवरों को उन्होंने जहां भी रखा था सुरक्षित रखा था। एनडीआरएफ की टीम ने जानवरों को सुरक्षित निकाला। जहां एक तरफ एनडीआरएफ टीम बाढ़ पीड़ितों को बचाने में लगी थी। वहीं दूसरी तरफ घाघरा की धारा से टूटे एनएच को बचाने के लिये बोल्डर बिछाये जा रहे थे। यहां स्वयं डीएम प्रवीण कुमार, एसपी विक्रांत वीर और सीडीओ ओजस्वी राज भी पहुंचे हुए थे।

खाली हाथ पहुंचे माननीय
बलिया। बाढ़ क्षेत्र का दौरा करने पहुंचे विधायक जयप्रकाश अंचल और सांसद सनातन पांडेय के पुत्र रामेश्वर पांडेय बाढ़ पीड़ितों के बीच खाली हाथ पहुँचे। चर्चा यह होती रही कि कम से कम विधायक को पानी, बिस्कट या अन्य सामान लेकर बाढ़ पीड़ितों के बीच जाना चाहिए था। लेकिन इसमें वह चूक गये। वहीं पूर्व सांसद भरत सिंह की बेटी विजय लक्ष्मी भोजन और पानी का पाउच लेकर बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंची, लेकिन वह भी पर्याप्त नहीं था। लेकिन फिर भी सेवा के लिए इतना बहुत था। वहीं पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह अपने लोगों के साथ खाली हाथ नजर आये। उनके द्वारा भी उस वक्त कुछ राहत सामग्री नजर नहीं आयी।

छपरा से आने वाले लोगों को एनडीआरएफ ने लाया इस पार
बलिया। छपरा से अपने गांव बैरिया, हल्दी की तरफ लौट रहे ग्रामीणों को उस वक्त फजीहत हुई जब उन्हें यह पता चला कि चांददियर में एनएच-31 ध्वस्त हो चुका है। वह किसी तरीके से घटनास्थल तक पहुंचे, लेकिन वहां से वह एनडीआरएफ के सहारे नदी पार कर उनको बैरिया की तरफ पहुंचाया गया।

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