25 मई से सूर्य दिखाएंगे प्रचंड रूप, अस्त रहेंगे गुरु और शुक्र

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25 मई से सूर्य दिखाएंगे प्रचंड रूप, अस्त रहेंगे गुरु और शुक्र

चिलचिलाती धूप और गर्मी के चलते घरों में दुबके लोग

नौ दिन तक नौतपा का रहेगा का प्रभाव, कई रिकॉर्ड तोड़ेगा तापमान

बलिया। जनपदवासी गर्मी से बेहाल हैं। चिलचिलाती धूप और गर्मी के चलते लोग घरों में दुबके हैं। जरूरी काम से जो बाहर निकल भी रहा तो धूप से बचने का हर उपाय करते दिख रहा। इसी बीच 25 मई से प्रचंड गर्मी का सामना लोगों को करना पड़ेगा। इस दिन नौतपा की शुरुआत हो रही है। इसका प्रभाव नौ दिनों तक रहेगा।
वर्ष के सबसे गर्म दिनों में मई महीने के आखिरी सप्ताह होंगे। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के साथ ही नौतपा की शुरुआत 25 मई से हो जाएगी और दो जून तक इसका प्रभाव रहेगा। नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें सीधी पृथ्वी पर पड़ती हैं और नौतपा के नौ दिनों को वर्ष का सबसे गर्म दिन माना जाता है। 24 साल बाद नौतपा की अवधि में गुरु और शुक्र ग्रह अस्त रहेंगे। पंडित डॉ. भूपेंद्र मिश्र ने बताया कि 25 मई की दोपहर में 3:17 बजे सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और आठ जून तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। इसके साथ ही नौतपा की शुरुआत हो जाएगी। रोहिणी नक्षत्र में आने के साथ ही सूर्य वृष राशि में गोचर करेगा। वृष राशि में पहले से गोचर कर रहे गुरु और शुक्र ग्रह के चलते त्रिग्रही योग भी बनेगा। करीब 24 वर्ष बाद नौतपा की अवधि में गुरु और शुक्र ग्रह अस्त रहेंगे। पंडित डॉ. भूपेंद्र मिश्र ने बताया कि रोहिणी नक्षत्र में सूर्य का तेज बढ़ जाता है और वह पृथ्वी के सबसे नजदीक होते हैं। उनकी किरणें सीधी पृथ्वी पर पड़ती हैं। उन्होंने बताया कि नौतपा के दौरान तापमान कई रिकॉर्ड तोड़ेगा। इस दौरान दिन की अवधि बढ़कर 13 घंटे 35 मिनट तक रहेगी। नौतपा के शुरुआती पांच दिन गर्मी ज्यादा पड़ने के आसार बन रहे हैं। इसके बाद आंधी-वर्षा के योग बनने से नौतपा खंडित होगा और खंडवृष्टि के योग रहेंगे।

इनसेट…
करें सूर्य देव की आराधना और दान
बलिया। पंडित डॉ. भूपेंद्र मिश्र ने बताया कि नौतपा के दौरान भगवान सूर्य की आराधना विशेष फलदायी होती है और सूर्य मजबूत होते हैं। रोजाना सूर्योदय में उठकर स्नान करने के बाद तांबे के लोटे से जल का अर्घ्य देते हुए सूर्य को देखें। ऐसा करने से जीवन में सकारात्मकता उर्जा का संचार बना रहता है। भगवान सूर्य को प्रसन्न करने के लिए शास्त्रों के मुताबिक दही सत्तू, घड़े में भरा जल रसदार फल आदि का दान करना चाहिए।

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