
मृतक आश्रित कोटे से दो युवकों को मिली सरकारी नौकरी, डीएम ने सौंपा नियुक्ति पत्र
एक को कनिष्ठ लिपिक तो दूसरे को चतुर्थ श्रेणी के पद पर मिली जिम्मेदारी





बलिया। सेवाकाल के दौरान पिता को खोने वाले दो परिवारों को प्रशासन ने राहत देते हुए उनके आश्रित पुत्रों को सरकारी नौकरी प्रदान की है। जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय कक्ष में मृतक आश्रित कोटे के तहत अखिलेश कुमार वर्मा और निरंजन कुमार खरवार को नियुक्ति आदेश सौंपा। इनमें अखिलेश कुमार वर्मा को कनिष्ठ लिपिक, जबकि निरंजन कुमार खरवार को चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्त किया गया है।



नियुक्ति पाने वाले अखिलेश कुमार वर्मा स्वर्गीय भारद्वाज मुनि वर्मा के पुत्र हैं। उनके पिता कलेक्ट्रेट के सदर नजारत में वाहन चालक के पद पर कार्यरत थे। वह मनियर (देवापुर), तहसील बांसडीह के निवासी हैं। वहीं निरंजन कुमार खरवार स्वर्गीय सुशील कुमार के पुत्र हैं। उनके पिता भी कलेक्ट्रेट के सदर नजारत में माली के पद पर तैनात थे। दोनों कर्मचारियों की सेवाकाल के दौरान मृत्यु के बाद उनके आश्रित पुत्रों ने मृतक आश्रित कोटे में नौकरी के लिए आवेदन किया था। उत्तर प्रदेश सेवाकाल में मृत सरकारी सेवकों के आश्रितों की भर्ती नियमावली- 1974 एवं उसके संशोधित प्रावधानों के तहत गठित समिति की संस्तुति के आधार पर दोनों को नियुक्ति दी गई है। अखिलेश कुमार वर्मा को समूह-ग के अंतर्गत कनिष्ठ लिपिक के रिक्त पद पर 5200-20200 रुपये वेतनमान, 2000 रुपये ग्रेड पे और पे-लेवल तीन के तहत अस्थायी नियुक्ति प्रदान की गई है। उनकी नियुक्ति दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर होगी। वहीं निरंजन कुमार खरवार को समूह-घ के अंतर्गत चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पद पर 5200-20200 रुपये वेतनमान, 1800 रुपये ग्रेड पे और पे-लेवल एक के तहत नियुक्त किया गया है। उनकी परिवीक्षा अवधि एक वर्ष निर्धारित की गई है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर बढ़ाया जा सकता है।

नियुक्ति आदेश में दोनों को सात दिनों के भीतर कार्यभार ग्रहण करने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए उन्हें स्वास्थ्य प्रमाण पत्र, दो राजपत्रित अधिकारियों के चरित्र प्रमाण पत्र, शैक्षिक योग्यता से संबंधित मूल अभिलेख तथा निर्धारित शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा। अखिलेश कुमार वर्मा को विशेष रूप से एक वर्ष के भीतर कंप्यूटर संचालन और हिंदी टंकण में 25 शब्द प्रति मिनट की निर्धारित गति हासिल करनी होगी। ऐसा नहीं करने पर उनकी वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का प्रावधान है। अतिरिक्त समय के बाद भी निर्धारित गति हासिल नहीं होने पर उन्हें चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति देने की व्यवस्था की गई है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियुक्ति के दौरान प्रस्तुत अभिलेखों और सूचनाओं के असत्य पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही मृतक आश्रित नियमावली के तहत नियुक्त कर्मचारियों को अपने आश्रितों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी का निर्वहन करना होगा। इसमें लापरवाही या इनकार की स्थिति में उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं।