
28 अक्टूबर को तेज हवा संग बारिश की आशंका, किसानों को सतर्क रहने की सलाह
बलिया में बेमौसम बारिश का अलर्ट, किसानों को दो दिन में धान काटने की सलाह

बलिया। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफान के प्रभाव से 28 अक्टूबर 2026 को प्रदेश में तेज हवाओं के साथ बेमौसम बारिश होने की संभावना जताई गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग और प्रादेशिक मौसम केंद्र, लखनऊ की ओर से 26 अक्टूबर 2026 को जारी विशेष मौसम संदेश के मद्देनजर जिला कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। जिला कृषि अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह ने जनपद के किसानों से तैयार धान की फसल की कटाई अगले एक से दो दिनों के भीतर पूरी करने की अपील की है, ताकि संभावित बारिश, तेज हवाओं और अतिवृष्टि से फसलों को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए किसान भाई अपनी तैयार फसलों की कटाई तत्काल कर लें। कटाई के बाद फसल को सुरक्षित स्थान पर रखें, जिससे बारिश और तेज हवाओं के कारण उपज खराब न हो। उन्होंने यह भी कहा कि जिन किसानों ने रबी की फसलों की बुवाई के लिए तैयारी कर ली है, वे फिलहाल बुवाई से संबंधित कार्य मौसम की प्रतिकूल अवधि समाप्त होने के बाद ही करें।



फसलों की सुरक्षा के लिए इन उपायों को अपनाएं
कृषि विभाग ने किसानों को संभावित प्राकृतिक आपदा से फसलों को बचाने के लिए कई जरूरी उपाय अपनाने की सलाह दी है। फसलों को गिरने से बचाएं: खेतों में फसलों की जड़ों के पास मिट्टी चढ़ाएं। गन्ने की फसल को उचित सहारा दें और बांधकर रखें। फिलहाल सिंचाई स्थगित रखें।



मक्के की फसल की कटाई करें:
पक चुके मक्के को तत्काल तोड़ लें और उसे छायादार स्थान पर सुखाकर सुरक्षित भंडारित करें। पकी फसल को सुरक्षित रखें: यदि संभव हो तो तैयार फसल की कटाई कर उसे सुरक्षित स्थान पर रख दें। खेत में गिरी हुई फसल के बंडलों को बांध दें, ताकि नुकसान कम हो। केले के पौधों को सहारा दें: केले सहित उन पौधों को मजबूत सहारा दें, जिन पर फलों के गुच्छे लगे हुए हैं। साथ ही सिंचाई को फिलहाल स्थगित रखें।

किसानों से सतर्क रहने की अपील
जिला कृषि अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह ने किसानों से मौसम की स्थिति को देखते हुए समय रहते जरूरी कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग की ओर से सुझाए गए उपायों को अपनाकर किसान संभावित प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं। ऐसे में किसान अपनी तैयार फसलों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही कृषि कार्यों की योजना बनाएं।