बलिया में मां-बेटी हत्याकांड का खुलासा, परिवार का मुखिया ही निकला साजिशकर्ता

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बलिया में मां-बेटी हत्याकांड का खुलासा, परिवार का मुखिया ही निकला साजिशकर्ता

पत्नी की मानसिक और नेत्रहीन बेटी को लेकर सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित होने की आशंका में रची हत्या की साजिश

दो साथियों संग मिलकर दिया पति ने वारदात को दिया अंजाम

बलिया। रसड़ा थाना क्षेत्र के मुस्तफाबाद गांव में मां-बेटी की सनसनीखेज हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पत्नी की मानसिक स्थिति और नेत्रहीन बेटी को लेकर सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित होने की आशंका में परिवार के मुखिया ने ही दोनों की हत्या की साजिश रची थी। पुलिस के अनुसार, उसने गांव के दो युवकों को साथ मिलाकर वारदात को अंजाम दिया और फिर हत्या का आरोप अज्ञात लोगों पर लगाकर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया। स्वाट, सर्विलांस और रसड़ा पुलिस की संयुक्त टीम ने शनिवार को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लोहे का दाव और खून लगे कपड़े बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में मुस्तफाबाद निवासी 70 वर्षीय रामचीज गुप्ता पुत्र स्व. मिश्री साहू, 32 वर्षीय चंदन यादव पुत्र मोहन यादव और करीब 35 वर्षीय दिनेश गुप्ता पुत्र रविन्द्र गुप्ता शामिल हैं। तीनों को शनिवार को तड़के करीब 3:30 बजे सिधागरघाट से मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तार किया गया।


घर में पत्नी की हत्या, खेत में मिला था बेटी का शव


गौरतलब है कि 16 सितंबर की रात मुस्तफाबाद गांव में मान्ती देवी और उनकी 22 वर्षीय बेटी गौरी की हत्या कर दी गई थी। 17 सितंबर को रामचीज गुप्ता की तहरीर पर रसड़ा थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। तहरीर में बताया गया था कि घर पहुंचने पर पत्नी का शव पड़ा मिला, जबकि बेटी गौरी लापता थी। तलाश के दौरान उसका शव घर के पास खेत में बरामद हुआ था। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और स्वाट व सर्विलांस टीम को भी खुलासे के लिए लगाया गया। विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस की जांच परिवार के मुखिया तक पहुंची।

पत्नी और बेटी को लेकर रहता था नाराज
पुलिस के अनुसार, रामचीज गुप्ता की पत्नी मान्ती देवी की मानसिक स्थिति लंबे समय से ठीक नहीं रहती थी। वह कभी-कभी घर से निकल जाती थीं और कई दिनों बाद वापस लौटती थीं। वहीं, उनकी बेटी गौरी नेत्रहीन थी। ऐसे हालात में गौरी को दूसरों के घर मांगकर खाना पड़ता था। पुलिस का दावा है कि इन परिस्थितियों को लेकर रामचीज सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित होने की आशंका से परेशान रहता था। घटना से पहले वह मुस्तफाबाद चट्टी पर कथित तौर पर यह भी कह चुका था कि या तो वह अपनी पत्नी और बेटी को जान से मार देगा या खुद मर जाएगा।


पहले टालते रहे, फिर हत्या की योजना में हुए शामिल


जांच में पुलिस के सामने आया कि रामचीज ने गांव के ही चंदन यादव और दिनेश गुप्ता को अपनी स्थिति बताते हुए पत्नी और बेटी की हत्या की योजना में शामिल होने के लिए तैयार करने का प्रयास किया था। शुरुआत में दोनों तैयार नहीं हुए, लेकिन 16 सितंबर को वे उसकी योजना में शामिल हो गए। पुलिस के मुताबिक, उसी दिन शाम करीब सात बजे तीनों ने मिलकर मान्ती देवी और गौरी की हत्या कर दी। इसके बाद गौरी के शव को खेत में रख दिया गया। रामचीज ने घर में फैले खून को साफ किया और गांव में यह बात फैलाई कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसकी पत्नी और बेटी की हत्या कर दी है।

दाव और खून लगे कपड़े बरामद


पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त एक लोहे का दाव, रामचीज का घटना के समय पहना हुआ कुर्ता और चंदन यादव की टी-शर्ट बरामद की है। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 238, 61(2) तथा आर्म्स एक्ट की धारा 4/25 की बढ़ोतरी की गई है। गिरफ्तार तीनों आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई पूरी कर उन्हें न्यायालय भेज दिया गया।

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